भारतीय इतिहास की उच्च श्रेणी की 7 रमणीय राजकुमारियाँ




भारतीय इतिहास राजसी परिवारों के वैभवशाली जीवन और सुंदरता की कथाओं से परिपूर्ण है। इन्ही शाही परिवारों की रमणीय राजकुमारियों की लंबी सूची है। जिनमें से हम आपको 10 चुनिंदा राजकुमारियों के विषय में बताने जा रहे हैं।

1. इंदिरा राजे

इंदिरा बड़ौदा की राजकुमारी थीं। इनका जन्म 19 फरवरी 1892 को हुआ था। इनके पिता सयाजी गायकवाड़ और माँ महारानी चिमनी बाई थीं। इनका विवाह कूच बिहार के राजकुमार जितेन्द्र नारायण से हुआ। जिनसे वह दिल्ली दरबार में मिली थीं। जितेन्द्र नारायण से विवाह करने के लिए उन्होंने ग्वालियर के महाराज माधो राव सिंधिया से अपनी सगाई तोड़ दी। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में यह साहसिक कदम उठाया था। सगाई टूटने के पश्चात उनके माता-पिता ने उन्हें भारत छोड़कर लंदन जाकर जितेन्द्र नारायण से विवाह करने की अनुमति दे दी। इन्होंने अपने जीवन में कई त्रासदियों का सामना किया। महारानी गायत्री देवी इन्हीं की पुत्री थीं। इंदिरा राजे ने अपने जीवन का अंतिम समय मुंबई में बिताया। सितंबर 1968 में इनकी मृत्यु हुई।

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2. सीता देवी बड़ौदा

सीता देवी पीतमपुरा के महाराज राजा राव वेंकट कुमारा महिपति सूर्य राऊ और रानी चिन्नाम्बा की पुत्री थीं। इनका पहला विवाह, वायुरू के जमींदार अप्पाराव बहादुर से हुआ, जिनसे इनके तीन बच्चे हुए। 1943 में मद्रास में घुड़दौड़ में इनकी मुलाकात प्रताप सिंह गायकवाड़ से हुई जो उस समय दुनिया के आठवें सबसे अमीर आदमी थे। दोनों एक दूसरे के प्रेम में पड़ गए। अपना पहला विवाह तोड़ने के लिए कानूनी सलाह से सीता देवी ने इस्लाम धर्म अपना लिया और प्रताप सिंह गायकवाड़ से विवाह कर उनकी दूसरी पत्नी बन गईं। जिनसे उनका एक बेटा हुआ जिसका नाम सयाजी राव गायकवाड़ था। 1956 में सीता देवी ने गायकवाड़ को तलाक दे दिया और लंदन चली गईं। 1985 में सयाजी राव गायकवाड ने आत्महत्या कर ली, जिसके चार साल पश्चात सीता देवी की मृत्यु हो गई।

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3. निलोफर हैदराबाद

इनका जन्म 4 जनवरी 1916 को गोएस्टेप पैलेस, इस्तांबुल में हुआ था। इनके पिता का दामाद मोरलिजादा सालारूद्दीन थे। 16 वर्ष की आयु में इनका विवाह हैदराबाद के अंतिम निजाम के दूसरे पुत्र मोअज्जम जाह से हुआ। 1952 में शादी के 21 साल बाद इनका तलाक हो गया। 21 फरवरी 1963 को निलोफर ने एडवर्ड जूलियस पोप से विवाह किया, जो एक युद्ध नायक, लेखक और फिल्म निर्माता थे। 12 जून 1989 को पेरिस में निलोफर का निधन हुआ।

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4. विजया देवी

28 अगस्त 1922 को जन्मी विजया देवी युवराज कांतेराव नरसिम्हा राजा बडियार की बड़ी बेटी थीं। यह कर्नाटक संगीत, नृत्य और वीणा वादन में निपुण थीं। 1941 में कोटड़ा सांगनी के ठाकोर साहब से इनका विवाह हुआ। वह इंटरनेशनल म्यूजिक एंड आर्टस सोसाइटी की संस्थापक और अध्यक्ष थीं। 8 दिसंबर 2005 को बैंगलोर के एक निजी अस्पताल में इनकी मृत्यु हुई।

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5. महारानी मेहताब कौर

1782 में जन्मी मेहताब कौर, गुरूबख्श सिंह कन्हैया और सादा कौर की पुत्री थीं। यह सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की पहली पत्नी थीं। इनके तीन बेटे थे- शेर सिंह, तारा सिंह और ईशर सिंह। शेर सिंह 1841 से 1843 तक सिख साम्राज्य के संस्थापक रहे। महारानी मेहताब की मृत्यु 1813 में अमृतसर में हुई।

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6. रानी पद्मिनी

रानी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह की रानी थीं। इस राजपूत रानी का अस्तित्व संदिग्ध है। इतिहासकार इनका अस्तित्व मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत के आधार पर मानते हैं पद्मावत के अनुसार इनके पिता सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और माता रानी चंपावती थीं।

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7. रानी लक्ष्मी बाई

झांसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। इनके पिता मोरोपंत तांबे और माता भागीरथी सापरे थीं। इनका बचपन का नाम मनु और छबीली था। इन्होने शास्त्रों की शिक्षा के साथ शस्त्रों की शिक्षा भी ली। इनका विवाह झांसी के महाराज गंगाधर राव से हुआ। यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना हैं। 23 वर्ष की आयु में अंग्रेज सेना से लड़ते हुए वे युद्ध भूमि में वीर गति को प्राप्त हुईं।

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