2025 आ चुका है और अगर सोशल मीडिया फ़ीड में फिलर्स, लिफ्ट्स और “एक्सोसोम्स” जैसे शब्द बार-बार नज़र नहीं आ रहे हैं, तो मान लीजिए शायद आप गलत डर्मेटोलॉजिस्ट को फ़ॉलो कर रहे हैं। फेस प्लास्टिक सर्जरी और एस्थेटिक ट्रीटमेंट्स इस समय अपने चरम पर हैं। बात अब सिर्फ “एज ग्रेसफुली” की नहीं रही, बल्कि नेचुरल दिखने, स्मार्ट साइंस और सही फ़ैसलों की हो गई है। आइए जानते हैं 2025 के सबसे बड़े ट्रेंड्स—अच्छे, बुरे और वे जिन पर सोचना ज़रूरी है।
वॉल्यूम रिस्टोरेशन बना 2025 का मेन कैरेक्टर
पिछले साल वज़न घटाने के ट्रेंड के साथ एक नया टर्म सामने आया—“ओज़ेम्पिक फ़ेस।” तेज़ी से वज़न कम करने पर चेहरे की प्राकृतिक फुलनेस भी कम हो जाती है। इसी वजह से 2025 में वॉल्यूम रिस्टोरेशन सबसे ज़्यादा डिमांड में है। फिलर्स और फैट ग्राफ्टिंग के ज़रिए चेहरे में फिर से यंग प्लम्पनेस लाई जा रही है। अब फ़ोकस शार्प जॉ-लाइन से हटकर हेल्दी, फ्रेश और ग्लोइंग फ़ेस पर है। हालांकि यहाँ एक पतली रेखा है—बहुत कम फिलर से चेहरा थका लगेगा और ज़्यादा से “पिलो फ़ेस” बन सकता है। सही बैलेंस ही असली ट्रेंड है।

फेसलिफ्ट्स की शानदार वापसी
कभी फेसलिफ्ट का नाम सुनते ही डर लगने लगता था—ज़्यादा टाइट स्किन, अजीब एक्सप्रेशन और साफ़ दिखने वाले निशान। लेकिन 2025 में फेसलिफ्ट्स पूरी तरह अपडेट हो चुके हैं। आज के फेसलिफ्ट्स ज़्यादा नेचुरल, मिनिमल स्कार्स वाले और बेहद सूक्ष्म होते हैं। 40+ उम्र के लोग अब समझने लगे हैं कि फिलर्स की भी एक लिमिट होती है। फिलर्स वॉल्यूम देते हैं, लेकिन ढीली त्वचा को ऊपर नहीं उठा सकते। यही वजह है कि अब “मिनी-लिफ्ट्स” भी ट्रेंड में हैं, जहाँ कम उम्र के लोग पहले से ही ग्रैविटी के असर को धीमा करना चाहते हैं।

रीजेनेरेटिव मेडिसिन
स्टेम सेल्स, पीआरपी और एक्सोसोम्स—ये शब्द अब साइंस फ़िक्शन नहीं, बल्कि ब्यूटी क्लिनिक्स की हक़ीक़त हैं। रीजेनेरेटिव मेडिसिन का मकसद है शरीर की खुद को रिपेयर करने की क्षमता को एक्टिव करना। कुछ क्लिनिक्स अब आपकी अपनी सेल्स से पर्सनलाइज़्ड स्किन ट्रीटमेंट्स तैयार कर रहे हैं। यह ट्रेंड चेहरे को “फ्रीज़” करने के बजाय उसे हेल्दी तरीके से रीजनरेट करने पर फ़ोकस करता है। ब्यूटी और वेलनेस का यह कॉम्बिनेशन 2025 का सबसे स्मार्ट मूव माना जा रहा है।

“नेचुरल बट बेटर” लुक की जीत
ओवरफिल्ड लिप्स और फ्रोजन फोरहेड का दौर अब खत्म हो रहा है। 2025 का गोल है—आपका चेहरा, बस थोड़ा और रेस्टेड वर्ज़न। अब लोग ऐसा दिखना चाहते हैं जैसे उन्होंने अच्छी नींद ली हो, सही खाना खाया हो और लंबी छुट्टी से लौटे हों। सबसे पसंदीदा रिज़ल्ट वही है जहाँ देखकर समझ न आए कि कुछ कराया है या बस ज़िंदगी अच्छी चल रही है।

मेडिकल टूरिज़्म का ख़तरनाक आकर्षण
सस्ती सर्जरी का लालच आज भी बहुत लोगों को विदेशों की ओर खींचता है। छुट्टी और सर्जरी एक साथ—सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है। कई जगह फ़ेक पहले-और-बाद की तस्वीरें, अधूरी आफ्टरकेयर और क्वालिटी से समझौता किया जाता है। याद रखिए—चेहरा सिर्फ़ एक है। कुछ पैसे बचाने के चक्कर में बड़ा नुकसान हो सकता है।

“टू टाइट” और एक्सट्रीम ट्रेंड्स से सावधान
हालांकि नेचुरल लुक ट्रेंड में है, फिर भी कुछ लोग और सर्जन्स आज भी ओवरकरेक्शन की गलती कर रहे हैं। ज़्यादा टाइट फेसलिफ्ट या एक्सट्रीम कैट-आई और फ़ॉक्स-आई ट्रेंड्स शुरू में फ़िल्टर जैसे लग सकते हैं, लेकिन वक़्त के साथ ग्रैविटी इन्हें बिगाड़ देती है। चेहरे की खूबसूरती उसके बैलेंस में होती है। उसे ज़बरदस्ती बदलने की कोशिश अक्सर लंबे समय में नुकसान देती है।
